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भारत की जनता को सलूट - रामकेश एम् यादव

भारत की जनता को सलूट - रामकेश एम् यादव

भारत की जनता को सलूट !

कोरोना वायरस चीन के वुहान से चलकर जब हमारे देश में दाखिल हुआ तब हमारी भारत सरकार आनन फानन में लॉक डाउन करने का दृढ़ निश्चय किया जो काबिले तारीफ है। देश की जनता ने प्रधानमंत्री को अपनी - अपनी लक्ष्मण रेखा से निराश नहीं किया। विश्व के अन्य देशों जैसे - अमेरिका, इटली, ईरान, ब्राजील, फ्रांस. इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया,जर्मनी, जापान आदि से हमारी स्थिति बेहतर है, इसका श्रेय इस देश की जनता को जाता है।

लॉक डाउन पर लॉक डाउन लदते चले गए। गांव के अलावा शहरी जनता छोटे -छोटे घरों में रहने के लिए कृत संकल्प हुई। हालत सभी का एक जैसे न होने के कारण प्रवासी मज़दूर अपने - अपने घरों की तरफ लौटने के लिए विवश हो गए। रोजी - रोटी

के अभाव में शहरों में टिकना कठिन हो गया। घर वापसी का रास्ता भी इतना आसान नहीं था। घर पहुंचाने का दारोमदार जिस पर था वो दृढ़ता से उस पर काम नहीं कर सके। अब बेबस प्रवासी मजदूर अपने वीबी, बच्चों के साथ सड़क मार्ग से होते हुए पैदल ही घर के लिए निकल पड़े । हजारों- हजारों किलोमीटर का फासला तय करना कोई आसान काम नहीं था । रास्ते में इतनी दुश्वारियों

 का सामना करना पड़ा कि मज़दूरों के पैर लहू लुहान हो गए। एक तरफ भूख - प्यास, तो दूसरी तरफ नन्हे - मुन्ने बच्चों को सम्भलना कठिनतर

होता जा रहा था। इस तरह के प्रवासी मजदूर कुछ घर पहुँचे तो कुछ रेल से कटे तो कुछ वाहन से कुचले गए तो कुछ हताश - निराश राह में ही दम तोड़ दिए। अगर कायदे से प्रवासी मजदूरों के दुख : दर्द का बयान किया जाए तो कलम की स्याही ही कम पड़ जाएगी। आँखों से खून की नदी बहने लगेगी। जो राष्ट्र की रीढ़ कहे जाते हैं, जिनके बिना विकास का पहिया घूमना कोरी कल्पना है। बड़े - बड़े बांध, कल -कारखाने, बिल्डिंग, नहर, तालाब, स्कूल - कालेज, हॉस्पिटल, मार्ग, महामार्ग, खदान, रेल- पटरी, सड़क... आदि.. आदि काम यही मजदूर ही तो करते हैं जिसके पसीने से सभी के घरों में सुकून के फूल खिलते हैं... बेचारे अपने ही देश में बेबस हो गए। दूसरी तरफ राज्य सरकारें राजनीति की शिकार हो रही थी। उसे समझ में ये नहीं आ रहा था कि ऐसे हालत में वो करे तो क्या करे? फिर भी कुछ मज़दूरों को सरकारें ट्रेन - बस से उनके गंतव्य तक पहुंचाई जो नाकाफी था।

मेरे ख्याल से जब हमारे देश में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या 100-200 की थी, उसी वक़्त योजनाबद्ध तरीके से प्रवासी मजदूरों को उनके गंतव्य तक पहुँचाने की व्यवस्था कर देनी चाहिए थी लेकिन इस देश की विडंबना है कि तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा। ये नारा आज भी जिन्दा है जैसे लाख कोशिशों के बावजूद भी परेल मुंबई का पुल तब तक नहीं बन सका जब तक 23 लोगों की जान नहीं चली गई। ऐसे यहाँ सैकड़ो उदाहरण आपको मिल जायेंगे। जब मजदूर सड़क हादसे के शिकार होने लगे या राह में कठिनतर स्थिति से गुजरने लगे तब जाकर सरकारों ने उन्हें घर पहुंचाने का अपना - अपना खाका तैयार किया। अपने ही देश में प्रवासी मजदूर जिल्लत भारी जिन्दगी जीने के लिए मजबूर हो गए।

दूसरी तरफ 135 करोड़ आबादी वाला ये देश स्वास्थ्य सेवाओं पर अपनी कुल जी डी पी का मात्र 1.3 प्रतिशत ही खर्च करता है जो ऊँट के मुँह में जीरा जैसा है। देश में कुल 26 हजार सरकारी अस्पताल हैं जिसमें नर्सो और दाईयों की संख्या लगभग 20.5 लाख और मरीजों के लिए

 शैय्याओं की संख्या लगभग 7.13 लाख है। इस तरह एक लाख आबादी के लिए सिर्फ 2 अस्पताल उपलब्ध है, जो नाकाफी है। इस तरह हमारे देश में डाक्टरों और दवाओं की भारी किल्लत रहती है। आज कोरोना बीमारी की रोकथाम के लिए प्राइवेट हॉस्पिटल और डॉक्टर्स इस सेवा में लिए जा रहे हैं हालांकि दूसरी तरफ हमारे देश के डॉक्टर और दवाएं दूसरे देशों में अपना बड़ा रोल अदा कर रहे हैं जिसकी भूरी - भूरी प्रशंसा अखिल विश्व कर रहा है। वसुधैव कुटुंम्बकम की जो बात आ गई।  

इस देश की जनता इतनी अनुशासित है कि किसी भी आपातकाल में तुरंत एक हो जाती है। अनेकता में एकता की इसकी यही मिसाल है और यही इसका जादू है। यही इसकी सुगंध भी है । आज 2 महीने के दिन एक लक्ष्मण रेखा के अंदर ही बीत गए। बिना धूप., बिना ताजी हवा पाए। वहीं दुनिया के विकसित देश तथा अन्य देश इस तरह की सावधानी का पालन करते कम दिखे।

कुदरत के बताये रास्ते पर जीवन यापन करना हमारी संस्कृति का मूल मंत्र है। सूर्य, चंद्र, अग्नि,पृथ्वी, पर्वत -पहाड़, वायु, जल, नदी, नभ आदि... आदि की पूजा - अर्चना, उपासना हमारे दैनन्दिनी में शामिल ही है। इन्हीं संस्कारों की बदौलत हम अपने जीवन के अंतिम लक्ष्य अर्थात मोक्ष को प्राप्त करते हैं..। पूरी दुनिया इसी बात की कायल है।

हमारी पूर्व प्रधामंत्री श्रीमती इंदिरा गाँधी जी का एक नारा मुझे याद आता है - अनुशासन ही देश को महान और मजबूत बनाता है। इसी मंत्र का हमें आज पालन करना है....। वर्तमान प्रधान मंत्रीजी के नेतृत्व में हम कोरोना को हरायेंगे. इसमें संशय नहीं।

गंगा -यमुना की तरह हम भारतवासियों का दिल साफ है.. हम अपने देश को कॉरोन मुक्त तो करेंगे ही .. साथ ही साथ अखिल विश्व के लिए एक मिसाल भी बनेंगे। अंततोगत्वा कानून के दायरे में रहकर हमारे देश की जनता जनार्दन ने जिस संयम का पालन कर लॉक डाउन को सफल बनाया है, मैं उसे सलूट करता हूँ।  

                     जय हिन्द !

- लेखक : रामकेश ऍम. यादव,

   (कवि, साहित्यकार ), मुंबई,