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बखिया उधेड़ ( साझा काव्य संग्रह ) - हिंदी पुस्तक बैंक की प्रस्तुति -

बखिया उधेड़ ( साझा काव्य संग्रह ) - हिंदी पुस्तक बैंक की प्रस्तुति -

विजय छिलाई करते हैं  



दिन भर क्या करते हैं वो

टांग खिचाई करते हैं

चीन के लगते सग्गे भाई

पाक जमाई लगते हैं।


अच्छा धंधा है मित्रो ये

बडी कमाई करते है।

क्यों कर अकड़े हो मित्रो

सही खिचाई करते हैं।


छोटा सा लगता है जो

काम कसाई करते है।

राष्टधर्म के नाम पर ये

रस्म अदाई करते है।


इंच न भायी राष्ट्र मजाकी

हम भौजाई लगते हैं।

हां सीमा के पार हमेशा

 चोर सगाई करते है।।


हल्का मीठा जहर घोलते

यही इसाई करते है।

सब कुछ फ्री बाटते क्यों

मुफ्त भलाई करते हैं।


आजों परपाजों से जिनके

काम यही होता आया।

संसद के अंदर भी वो

आंख दबाई करते हैं।


उनको पहचानो मित्रो जो

 नाच नचाई करते है

सचमुच ही बलिदानी जो

उन्हे बधाई करते हैं ।


लोग तो रोटी को तरसें

दूध मलाई करते है।

आज समेटो दम हो तो

"विजय" छिलाई करते है।


प्रधान संपादक

- विजय कुमार मिश्र

(हिन्दी पुस्तक बैंक)

मोबा 6260201191

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आलू बण्डा चाय समोसा



मत पूछो करते हैं कैसा।

चाहे जहां से आये पैसा।

कुछ भी करते ऐसा वैसा।

उनके घर में पैसा पैसा।


हमको सब कुछ मालुम है।

वो करते है जैसा जैसा।।

जैसा आका कहते जाते

करते जाते वैसा वैसा।


अब तक नही समझ आया।।

अक्ल बडी या भैंसी भैंसा।।।

बात बात में लड़ जाते हैं

और बढाते टेसी टैसा।।


एसडीओ बैठा हो फिर भी

फाइल में रख जाये पैसा।

बाबू तो बाबू ही रहता।

बस आलूबंडा चाय समौसा।



संपादक

सुमन कवयित्री

व्हाट्सअप 6260201191


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आज की सियासत

                 

जो कल तक दुश्मन थे पक्के,

 आज मोहब्बत कर बैठे हैं।

एक शेर से इतने गीदड़,

कितनी नफ़रत कर बैठे हैं।।


आधे-आधे पर राजी हैं,

कल तक जो मालिक थे पूरे,

सत्ता के लालच में नेता,

कैसी सियासत कर बैठे हैं।।


पहले सोंच रहे थे वो सब,

जनता है नादान यहां की,

इसीलिए जनता की कमाई, अपनी दौलत कर बैठे हैं।।


आज हिसाब मांगने वाला,

जब सिंहासन आसीन हुआ तो,

बने चोर चोर मौसेरे भाई,

सच ये कहावत कर बैठे हैं।।


सेना के शौर्य पे शक है,

 पर देशद्रोही को 'साहब''जी'कहते ,

विरोध का रूप कुरूप किया है,

 ऐसी बगावत कर बैठे हैं।।


पाकिस्तान भी खुश होता है,

इनकी नमकहरामी पर,

आतंकवादियों के हक की,

यह इतनी हिफाजत कर बैठे हैं।।

       


संकेत मिश्रा'राज'

जिला-बरेली (उत्तर प्रदेश)

मोबा 9758241233


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जंग जरूरी है



कैसी हो गई सरकार देश की,

बातें लम्बी चौड़ी करती है,

अपने ही देश में दुश्मनों को,

घुस आने का मौका देती है।


बातें करती निकल जाने को,

और अपनों का सर कटाती है,

बिजनेस के लिए छुट भी देती,

दोस्ती का परिचय भी देती है।


समय का अपना मांग होता है,

देशवासियों का सम्मान होता है

देश का बच्चा बच्चा बोल रहा है

मोदी जी का गुण गा रहा है।


हर हर मोदी घर घर मोदी ,

वोर्डर पर भी मोदी मोदी,

जानता नहीं चीन मोदी को,

बात नहीं अब जंग जरुरी ।


लद्दाख धरती का टुकड़ा नहीं,

मां भारती का आंचल है वह,

क्या समझता है चीन भारत को,

वहीं उन्नीस सौ बासठ का देश।


नाम है भारत की

 सेना का दुनिया में,

है कटिवध्य अखण्डता

अक्षुण रखने में,

विश्व धरातल पर

किसी भी देश से,

लोहा लेने का दम

खम रखता है।


अल्टीमेंटम देना होगा चीन को,

चौबीस घण्टे में खाली करो,

आंखे लाल लाल करके उसे,

सख्त लफ्जों में बात करो।


पूरा देश खड़ा है मोदी के संग,

चीन को औकात दिखाने को,

ये है भारत दो हजार बीस का,

नेतृत्व विश्व वोध कराने को।

नहीं रण हो।



रामजी पाठ "खोवेश

दरभंगा (बिहार)

मोबा 9155306287


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कुर्सी की खातिर

   नेता जी



नेताजी मर्यादा भूले,

राजनीति चमकाने में ।


दिन - रात लगे हुए हैं,

कुर्सी को हथियाने में ।


प्रधानमंत्री की कुर्सी है,

ये बच्चों का खेल नहीं ।


दौड़ भाग से मिल जाए,

ये भारत की रेल नहीं ।


जनता की भावनाओं का,

नेता करते सम्मान नहीं ।


कभी टोपी कभी जनेऊ,

इनकी कोई पहचान नहीं ।


बहरूपिया बने हुए हैं,

राजनीति के गलियारों में ।


तिलक लगाकर वोट मांगते,

जनता के दरबारों में ।


मंदिरों का विरोध करके,

राजनीति चमकाते हैं ।


तुष्टिकरण की राजनीति से,

वोट बैंक बनाते हैं ।


भगवाधारियों की हत्या का,

इनको कोई परवाह नहीं ।


सोना मांगने का मंदिरों से,

 इनको है अधिकार नहीं ।


दान दिया है भक्तों ने,

जो मंदिरों की संपत्ति है ।


मंदिरों ने सहयोग किया,

जब भी पड़ी विपत्ति है ।


मंदिरों का सोना मांगने वाले,

 क्या यह बताएंगे ।


देशहित में संपत्ति अपनी,

 कितनी दान कराएंगे ।


सबूत मांग कर रामसेतु का,

राजनीति चमकाएंगे ।


राम को काल्पनिक बताने वाले,

 मंदिरों का सोना लेकर जाएंगे ।


नीति कैसी है राजनीति की,

 क्या नेता जी बताएंगे ।


तुष्टिकरण की राजनीति से,

 प्रधानमंत्री बन पाएंगे ।



कोरोना लॉकडाउन और,

 प्रवासियों पर राजनीति ।


झूठ बोलना भ्रम फैलाना,

 क्या यही है इनकी नीति ।


महागठबंधन भी खो गया है,

 गुफाओं के अंधकार में ।


भारत बचाने की याद आएगी,

 चुनावी बहार में ।


मफलर वाले सीएम साहब,

बातें खूब बनाते हैं ।


मुफ्त - मुफ्त चिल्लाकर अपनी,

 राजनीति चमकाते हैं ।


हद हो गई राजनीति की,

 बंधन सारे खुल गए ।


कुर्सी खातिर नेताजी,

 मान - मर्यादा भूल गए ।


अनुज कुमार उपाध्याय

 गोरखपुर, उत्तर प्रदेश

मोo -  9621220102


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पुलिस दुलहिन,

अपराधी उनकै वर होयगा



जनता डेरान बदमशवा

निडर होयगा ।

परसपुर कै थाना देखौ

खाला जी कै घर होयगा ।।


होय मारपीट,रोज

होय फौजदारी ।

कहूं चलै चाकू,

कहूं होय गोलीबारी ।।


हरा भरा राह अपराध

कै डगर होयगा-

परसपुर कै थाना देखौ...


कहूं बलत्कार,

कहूं होत है डकैती ।

कहूं पर जमीन

खातिर मार देत गैंती ।।


पुलिस दुलहिन,

अपराधी उनकै वर होयगा-

परसपुर कै थाना देखौ..


जेहका चाहैं मारि

देंय रुपया दै आवैं ।

पुलिस प्रशासन न

दुवारे तक आवैं ।।


क्राइम रूपी ट्रैक्टर,

फारचूनर होयगा-

परसपुर कै थाना देखौ...


शौलेन्द्र मणि मिश्र

मोबा 6393695151



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अर्थ बिना कविता नहीं-



अर्थ बिना कविता नहीं,

कविताई बेकार।

सामाजिक परिदृश्य का ,

जिसमें नहीं सुधार।।


दर्पण लेकर खुद नहीं,

देख सके जो मित्र ।

कैसे सामाजिक सखे,

दूर करेंगे ख़ार ।।


जन-जन में विद्वेष है

जन-जन बढ़ता द्वेष ।

सामाजिक परिवेश का,

भूल रहे सत्कार ।।


सत्य कलम से लिख दिया,

नहीं किया प्रतिवाद ।

ध्यान नहीं देती कभी

कवियों पर सरकार ।।


करते सम्मुख दोस्ती,

किन्तु पीठ पर घात।

आस्तीन में छिपे हैं ,

ऐसे मित्र हजार ।।


सामाजिक समृद्धि हो,

समता पलेजहांन।

गौतम कमल लिखे चलो  

बढ़े परस्पर प्यार ।।


जितना भी हो बन पड़े ,

करें विचार विमर्श ।

सदा सत्य संकल्प हित,  

लिखे भाव विस्तार ।।


कमलापति गौतम कमल

सीधी (मप्र)

मोबा 8827748188



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बखिया उधेड़



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 दो महिलाओं की