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बखिया उधेड़ती पांच रचनाएँ - विजय कुमार मिश्र जबलपुर

बखिया उधेड़ती पांच रचनाएँ - विजय कुमार मिश्र जबलपुर

#बखिया_उधेड़ (01)


ना भाजपा खाने देती

ना कांग्रेस पीने को ।

है कोई जो टक्कर दे दे

छप्पन इंची सीने को।


बस कुत्तों की फौज भौकती

ज्यों हाथी को देखा।

देखो भईया गौर से देखो

अपने हाथ की रेखा।


चीन पाक के पक्के वाले

कब से ऐजेंट बने है।

मिंया मिठ्ठू बनते है खुद

और खुद अर्जेंट बने हैं।


चीन पाक ने कांग्रेस को

किस रस्से में बांधा है।

देशधर्म की सारी सीमा

इनमे मिलकर लांघा है।


केवल इक दो तीन नहीं

अनगिन है मजमूमन।

कडी कार्रवायी हो अब

तो पूरी तरह कानूनन।।


कोरोना औ तीन पाक का

करते दिखें समर्थन ये।

और सामने देश के अपने

करते खडी हैं अड़चन ये


बहुत लचीला बना हुआ है

ये संविधान भारत का ।

जनता ने ही करा दिया है

हां अंदाजा ताकत का।।


संसद जाने के लायक भी

अब बचीं नहीं है सीटे

पीटें चाहे जितना भी

पर थोडा बहुत घसीटें।

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#बखिया_उधेड (02)


हॉ ऐसा कोई बचा नहीं।

जिसको भी उसने ठगा नहीं।


वो बासठ नहीं बीस है ये

लो चीन को इतना पता नहीं।


बस इसीलिये चीन उडता है।

की उसके जैसा मिला नहीं।


गयी बात गनपत के द्वारे।

चल हमसे पाला पड़ा नहीं।


ये सारे कर्म नेहरु के हैं।

इतिहास झूठ पर खड़ा नहीं।


चीन चीन अल्लाता रहता

नाक को थोडा लगा नहीं।


चीन पाक की ओर खडे जो

क्या उनको कोई सजा नहीं ।


हो रद्द मान्यता कांग्रेस की

कानूनन कोई दफा नही।।


हम तो खुल कर बोल रहे हैं।

राहुल सा कोई गधा नहीं।

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#बकिया_उधेड़ (03)


हम जो कहते सच कहते

मिर्ची लगे या चूना है

आगे आगे और देखिये

ये तो सिर्फ नमूना है।।


बक बाजी ना हमको भाती

कान खोलकर सुन लो।

जो कहना डट कर कहते

ये बात हमारी गुन लो।।


पहले पढते फिर हम गुनते

तब लिखते हैं जाकर

कारण सहित गलत है यदि

तो कहें सामने आकर।


बस विरोध कर देना ही

होती कोई बात नहीं।

वो बासठ नही बीस है ये

अब पहले से हालात नही।


मेरा भारत खडा हुआ है।

अब पीछे होगा पैर नहीं

नहीं लौटता वापस तो

तो ड्रैगन तेरी खैर नहीं।।


चीन पाक दोनो लड जायें

तो भी हमको फर्क नहीं

डबल दचाका मारेगे

इसमें कोई तर्क नहीं।।


पिछलग्गू जो चीन पाक के

उनको हम ना छोडेंगे।

दौडा दौडा मारेगे और

बम्म पटाखा फोडेंगे।।

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#बखिया_उधेड़ (04)


देश विरोधी राम विरोधी

रोजगार और काम विरोधी ।।


जब भी आता है उनका

होता हर पैगाम विरोधी।।


पूरा का पूरा कुनबा ही

लगता हमें तमाम विरोधी।।


सात साल सत्तर पर भारी

ये भी है इल्जाम विरोधी।।


मुझसे ज्यादा ना कह पायें

जो भी इनके आम विरोधी।


देश धर्म है सबसे पहले तो

अपने आप को थाम विरोधी।।


गाय छाप से काम चलाते

साबुन नहीं हमाम विरोधी।।


आज नहीं कल चल जाएगा

बहुत तेज है घाम विरोधी।।


बुद्धि और विवेक के संग संग

हो गई इनकी चाम विरोधी।।

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#बखिया_उधेड (05)


लोग बहुत देखे हैं हमने

वैसे इस दुनिया में

किसको कितनी दिखे योग्यता राहुल और सोनिया मे।।


रत्ती भर भी दिखे नहीं है

संस्कृति का ज्ञान सखे।

फिर भी इनको लादे फिरता

क्योंकर हिंदुस्तान सखे।।


ना अस्तित्व राम का समझें

ना ही हिंदुस्तान का ।

इनको तो सपना दिखता है

इटली औ जापान का।


आलू से सोना बन जाता

चला नहीं यह मंत्र पर

जाने कैसे-कैसे धब्बे हैं

भारत मेरे स्वतंत्र पर।


मनमोहन से उस पुतले को

पी ऐम बना दिया ।

इसी बहाने इनने अपना ही

बस गेम बना लिया।


विश्व पटल की सरकारों में

इतने घपले नहीं हुये।

सिर्फ अकेले मन मोहन ने

एक रूपये भी नही छुये।


हम दिन भर मजदूरी करते

तभी शाम को खाते हैं ।

अरबों खरबों इनके घर में

आखिर कहां से आते हैं।।


कुछ ना कुछ तो गड़बड़ है

बहुत बड़ा घोटाला है।

उनको क्या बोलें जिनने

इन सांपों को पाला है।


अगर सांप आस्तीन में हो तो

खुद को ही काटेगा।

खुद बुल में छिप जाए जाकर तुमको ही मारेगा।


कांग्रेस में बहुत लोग हैं

इनसे ऊंचे ऊंचे

चम्मच बनकर घूम रहे सब

क्यों कर आज समूचे।।


ना ही सोनिया ना ही पार्टी

आगे अब चलने वाली।

चल गयीं जितनी चलनी थी

और नही चलने वाली।


अब भी नहीं चूकिये मित्रो

रगड़ो इनको देश से

तुरंत निकालो इनको अब

प्यारी सी कंगरेस से।


ममता निकली शरद भी निकले और संगमा साथ में।

गांधी ही हैं सिर्फ रजिस्टर

कांग्रेस के हाथ में।

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विजय कुमार मिश्र

जबलपुर (मप्र)

मोबा 6260201191